स्वास्थ्य केन्द्रों में दी जा रही बेहतर सुविधा से गर्भवती महिलाएं खुश, सुकमा जिला प्रशासन के प्रयासों से संस्थागत प्रसव में हुई वृद्धि।
(रोहित साहू):- सुकमा जिले के घने जंगल, पहाड़ और नदी-नालों भरे रास्ते में कई चुनौतियां हैं। इन्हीं चुनौतियों में शामिल है, जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना। सुकमा जिला प्रशासन द्वारा इस चुनौती को स्वीकार करते हुए योजनाबद्ध ढंग से किए जा रहे कार्यों के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं।
सघन वन, पहाड़ और नदी-नालों से भरे दुर्गम रास्तों के बावजूद प्रसुताओं को समय पर स्वास्थ्य केन्द्रों में पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा रहा है। सुकमा जिले का अधिकांश क्षेत्र सघन वन, पहाड़ और नदी-नालों से घिरा हुआ है और उन क्षेत्रों में सड़क व संचार सुविधा के अभाव में प्रसुता महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरु होते ही अस्पताल तक पहुंचाना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। बारिश के दिनों में नदी-नालों के भर जाने से यह चुनौती और अधिक बढ़ जाती है। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा की लिए संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने हेतु दुर्गम क्षेत्र की प्रसुता महिलाओं को प्रसव की संभावित तिथि से लगभग दस दिनों पहले ही अस्पताल में भर्ती कर दी जाती है और इनके स्वास्थ्य की सभी जांच के साथ ही पोषक आहार भी जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया जाता है, जिससे इन महिलाओं को प्रसव के समय किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।
दुर्गम क्षेत्र की इन महिलाओं को प्रसव से दस दिन पहले अस्पताल लाने के लिए संबंधित क्षेत्र के स्वास्थ्य अधिकारियों को मोबाईल पर सूचना देने के साथ ही लगातार माॅनिटरिंग की जाती है। स्वास्थ्य अधिकारियों को मोबाईल पर सूचना देने के लिए भी सुकमा जिला प्रशासन द्वारा विकासखण्ड स्तर पर काॅल सेंटर स्थापित किया गया है। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए गर्भवती महिला की नियमित जांच हेतु महिला स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष केन्द्रीय सहायता मद से 50 स्कूटी भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ हीसंस्थागत प्रसव के लक्ष्य को शत-प्रतिशत हासिल करने के लिए गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा केन्द्र तक पहुंचाने में एम्बुलेंस की कमी न हो, इसके लिए जिला खनिज मद न्यास से नए एम्बुलेंस भी जिला प्रशासन द्वारा चिकित्सा विभाग को उपलब्ध कराया गया है। वहीं इन गर्भवती महिलाओं के ठहरने के लिए 19 स्थानों पर 5-5 बेड के नए वार्ड भी बनाए गए हैं। यहां ठहरने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को जिला प्रशासन द्वारा भोजन और आवास की निःशुल्क व्यवस्था भी की जा रही है। सुरंिक्षत प्रसव सुनिश्चित करने के लिए प्रसव पूर्व सभी आवश्यक जांच कर जरुरी दवाईयां देने के साथ ही एनीमिक महिलाओं को खून भी चढ़ाया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया कि वर्तमान में 78 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केन्द्रों में रखा गया है, जिनकी प्रसव तिथि निकट है। सुकमा जिला प्रशासन द्वारा केवल बच्चे के जन्म तक ही देखभाल की जिम्मेदारी नहीं ली जा रही, बल्कि शिशु के जन्म के बाद भी उसके सेहत की देखभाल की जा रही है और शिशु को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए शिशु सुरक्षा किट भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस किट में नवजात शिशुओं के देखभाल से संबंधित सामग्री दी जा रही है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोंटा में भर्ती नुलकातोंग की ताती पाण्डे ने बताया कि उनकी संभावित प्रसव तिथि 17 जुलाई को देखते हुए 6 जुलाई को ही भर्ती कर दिया गया था। यहां उसने 8 जुलाई को स्वस्थ शिशु को जंन्म दिया। यहां समय पूर्व भर्ती के कारण ही प्रशिक्षित चिकित्सकों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव होने पर पूरे परिवार में खुशी है अन्यथा प्रसव तिथि का इंतजार करने पर बात बिगड़ भी सकती थी। ताती ने बताया कि भर्ती के दौरान अंडे, दूध, केले, दाल, हरी सब्जियां आदि बहुत जरूरी पोषक आहार भी नियमित तौर पर उपलब्ध कराया गया और चिकित्सक द्वारा यहां नियमित तौर पर स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। साथ ही नर्सों के मिलनसार व्यवहार ने भी उसका हौसला बढ़ाया।



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