सरल करें स्व-रोज़गार स्थापित करने हेतु ऋण की प्रक्रिया -युवासेना युवासेना ने लिखा मुख्यमंत्री और उद्योगमंत्री को पत्र, कहा युवाओं को स्व-रोज़गार स्थापना हेतु सरल करें नियम
(गैंदलाल मरकाम):- छत्तीसगढ़ युवासेना के प्रदेश सचिव अरुण पाण्डेय् ने राज्य के मुख्यमंत्री भूपेष बघेल और उद्योग मंत्री कवासी लखमा को पत्र लिखकर मांग किया हैकि
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र द्वारा स्व-रोज़गार स्थापित करने हेतु चलाई जाने वाली योजनाओं में ऋण देने की प्रक्रिया को सरल किया जाना चाहिए।
उन्होंने राज्य के बेरोजगार युवाओं को व्यापार व उद्योग केंद्र के सहयोग से स्व-रोज़गार स्थापित करने हेतु दिए जाने वाले ऋण योजना के नियमावली में बदलाव करने की मांग की है।
युवासेना के प्रदेश सचिव अरुण पाण्डेय् ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री युवा स्व-रोज़गार योजना की स्तिथी ठीक ठाक नही है। और यही स्तिथी प्रधानमंत्री रोजग़ार सृजन कार्यक्रम का भी है।
बस्तर ज़िला उद्योग व व्यापार केंद्र के प्रबंधक डीएस पुसाम ने बताया कि इस वर्ष बस्तर ज़िला मुख्यालय में प्रधानमंत्री रोजग़ार सृजन कार्यक्रम के तहत 84 तो मुख्यमंत्री स्व-रोज़गार योजना हेतु 32 युवाओं को ऋण देने का टारगेट शासन द्वारा स्वीकृत किया गया है। जिसके लिए आआवेदन मंगाए जा रहे हैं, लेकिन युवाओं को ऋण मिलेगा या नही इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी बैंक की होती है। ज़िला व्यवसाय व उद्योग कार्यालय केवल मार्गदर्शन देने का कार्य मात्र करती है।
इस पर शिवसेना के तेज़तर्रार युवानेता अरुण पाण्डेय् का कहना हैकि जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालयों में स्व-रोज़गार स्थापित करने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम दिखावा मात्र हैं। दरअसल इस योजना के तहत विभिन्न पूर्व में तय व्यापार व उद्योग की सूची अनुसार ही ऋण देने का प्रावधान है, जोकि बहुत पुरानी है। जिसे नए जमाने के युवा स्वीकार्य नही कर पाते हैं।
अतः नए समय के अनुसार कुछ आधुनिक व्यवसायों को भी सूची में सम्मिलित किया जाना चाहिए। जिससे स्व-रोज़गार की स्थापना हेतु युवाओं में रुचि व आत्मविश्वास बढ़ेगा।
ऐसा उन्होंने कहा है।
अवगत होकि कोविड -१९ के संक्रमण के कारण लागू किए गए लॉक डाऊन के कारण अधिकतर छोटे व मध्यमवर्गीय व्यापार व कामधंधे बंद होने के कगार पर हैं। ऐसे में राज्य के युवाओं को स्व-रोज़गार हेतु जिला व्यापार व उद्योग कार्यालय द्वारा ही सरलता से उद्योग स्थापना हेतु ऋण प्राप्त हो जाये तब आर्थिक स्तिथी को मजबूत किया जा सकता है व देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी योगदान दिया जा सकता है।
परन्तु इस योजना के द्वारा नए व्यवसाय या उद्योग की स्थापना हेतु ऋण लेने के जो नियम बताए जाते हैं, उनमें से अधिकतर में प्रथम बार व्यवसाय आरंभ करने की इच्छा रखने वाले युवा के पास कई दस्तावेज़ों का अभाव होता है। जिस कारण वे इस योजना का लाभ नही उठा पाते हैं।
जिनमें प्रमुख रूप से इंकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल और अनुभव संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने में अधिकतर युवा सक्षम नही होते हैं।
इन दस्तावेजों के कारण बैंक द्वारा युवाओं को ऋण प्रदान नही किया जाता है, अतः ऐसी ऋण योजना हेतु जिला व्यापार व उद्योग केंद्र में ही युवाओं का पंजीयन हो सकें व न्यूनतम दस्तावेजों में ही उन्हें ऋण प्राप्त हो ऐसी व्यवस्था बनाने संबधित विभाग को निर्देशित करने की मांग मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री से किया गया है।


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