अनुसूचित क्षेत्र बस्तर अंचल में प्रशासन का शराब बेचना आदिवासियों के विरुद्ध -युवासेना


(गैंदलाल मरकाम):- छत्तीसगढ़ (बस्तर / जगदलपुर) । छत्तीसगढ़ राज्य में विधानसभा चुनाव से पूर्व हाथों में गंगाजल लेकर वर्तमान सरकार के लोगों ने आमजनता से वादा किया था कि सरकार बनते ही शराबबंदी कर दी जाएगी। सरकार तो बनी लेकिन शराबबंदी नही हुई। विधानसभा चुनाव के पूर्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में सरकार बनने पर पूर्ण शराबबंदी किए जाने की बात कही थी। राज्य के ग़रीब और मध्यम वर्गीय परिवार के लोग जो शराब के कारण परिवार को बर्बाद होते देखें हैं उन्होंने आपकी पार्टी के वादे पर विश्वास करके ही चुनाव में भारी बहुमत से जीत दर्ज़ कराया है।

शिवसेना के युवा इकाई युवासेना के प्रदेश सचिव अरुण पाण्डेय ने कहा हैकि कोविड -१९ के संक्रमण के कारण जारी लॉक डाऊन के समय पुनः शराब दुकान खोलने के निर्णय के बाद राज्य की जनता का विश्वास शराबबंदी के वादे पर से उठ गया है। कई परिवार इस अंग्रेज़ी / देशी शराब के कारण बर्बाद हो रहे हैं।

उन्होंने कहा हैकि बस्तर जोकि अनुसूचित क्षेत्र हैं व यहां आजीविका हेतु वनांचल में निवास करने वाले विशेष आदिवासी परिवारों को नीयत मात्रा में वनोपज़ से शराब निर्माण व बिक्री की संवैधानिक छूट दी गई है।

लेकिन पूर्व व वर्तमान दोनों सरकारों द्वारा इस बस्तर संभाग में अंग्रेज़ी /देशी शराब की बिक्री करके प्रशासन द्वारा ही बस्तर के इन आदिवासियों से उनका जीविकोपार्जन का हक़ भी छीना जा रहा है।

दरअसल अंग्रेज़ी / देशी शराब की उपलब्धता के कारण मदिरा प्रेमी प्रशासन द्वारा संचालित सरकारी दुकानों की तरफ़ आकर्षित होते हैं, जिसका की बस्तर अंचल के उन ग़रीब और नियमानुसार शराब बनाने व बेंचने के लिए अधिकृत आदिवासी परिवार पर होता है जिनकी जीविकोपार्जन का साधन मदिरा निर्माण व बिक्री मात्र है।

इस तरह प्रशासन ही सरकारी शराब के नाम से हितैषी बनने का मुखौटा लगाए आदिवासियों का हक़ व अधिकार मार रही है।

युवासेना ने कलेक्टर को सौंपे ग्यापन में प्रशासन से विनम्रता पूर्वक मांग करते हुए कहा हैकि बस्तर संभाग के किसी भी जिलों में अंग्रेज़ी व देशी शराब की बिक्री ना हों इसके लिए आवश्यक आदेश तत्काल जारी करते हुए आदिवासियों के संवैधानिक हक़ व अधिकार को संरक्षित रखा जाए।

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