कोंटा नगर पंचायत क्षेत्र के 7 हितग्राहियों ने अतिक्रमित भूमि का लिया भू-स्वामी अधिकार
(रोहित साहू) सुकमा:- कोंटा नगर पंचायत क्षेत्र के सात हितग्राहियों ने आज अतिक्रमित भूमि का भू-स्वामी अधिकार लिया।
छत्तीसगढ़ शासन की नई भू-व्यवस्थापन नीति के तहत अनुविभागीय राजस्व अधिकारी श्री हिमांचल साहू ने सभी सात हितग्राहियों को भू-अधिकार का पत्र सौंपा। उल्लेखनीय है कि नगरीय क्षेत्रों में अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नई नीति बनाई गई है।
इस नीति के तहत 15 साल का भू-भाटक एकमुश्त जमा करने पर भू-स्वामी को इसके अगले 15 सालों के लिए भी भू-भाटक जमा करने से छूट मिल रही है। इस प्रकार यदि कोई भू-स्वामी 15 साल का भू-भाटक अभी एक साथ जमा करता है तो उसे अगले 30 साल तक का भू-भाटक जमा नहीं करना होगा।
राज्य शासन ने नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि के अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन के लिए भूमि-स्वामी अधिकार देने संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
नगरीय क्षेत्र के अतिक्रमित शासकीय नजूल भूमि के व्यवस्थापन अन्तर्गत भूमि स्वामी हक प्राप्त करने के लिए भूमि आबंटन के समय प्रचलित गाईडलाईन दर के 150 प्रतिशत प्रीमियम राशि और 2 प्रतिशत फ्री होल्ड राशि मिलाकर 152 प्रतिशत राशि प्रचलित गाईडलाईन दर पर शासन को भुगतान करना होता है।
इसके साथ ही भू-भाटक, प्रीमियम का 0ण्3 प्रतिशत राशि जमा करना होता है। इस योजना के संबंध में और अधिक जानकारी संबंधित अनुविभागीय राजस्व अधिकारी, तहसीलदार या भू-अभिलेख शखा से प्राप्त किया जा सकता है। इस योजना के अन्तर्गत नगरीय क्षेत्रों में 7500 वर्गफीट तक की भूमि के लिए भू-स्वामी हक प्राप्त किया जा सकता है।
इस नीति के तहत लाभ लेने वालों को अतिक्रमण के आरोप, अतिक्रमित भूमि प्रकरण में बार बार पेशी व कब्जा तोड़े जाने की चिंता से भी छुटकारा मिल जाता है। जिले में तेजी से चल रहे विकास कार्यों के लिए भूमि की आवश्यकता होने पर अतिक्रमित भूमि को खाली कराया जा सकता है और बदले में कब्जाधारी को पुनर्वास नीति के तहत किसी भी प्रकार के मुआवजे की पात्रता नहीं होगी, जबकि शासन की नई नीति के तहत शासकिय भूमि का आबंटन कराने वाले भू-स्वामी को पुनर्वास नीति के तहत मुआवजा आदि सुविधाओं की पात्रता होगी।


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